लॉकडाउन में स्विगी के कर्मचारियों पर गिरी गाज

कोरोना वायरस के कारण स्विगी और दुनिया भर के कई देश इस समय लॉकडाउन से जूझने को मजबूर है देश बन्दी ने अर्थवयवस्था और उद्योग धंधों पर बहुत बुरा असर डाला है। जिसके चलते भारत में कई लोगों पर नौकरियों का खतरा मंडराने लगा है।

लॉकडाउन में फूड सर्विसेज में भारी गिराबट दर्ज की गई है जिसके चलते कई कंपनियों को काफी नुकसान झेलना पड़ रह है। इसी घाटे के चलते स्विगी जैसी कम्पनयों ने अपने कर्मचारियों को छटनी करने का मन बना लिया है। ऑनलाइन फ़ूड कंपनी स्विगी ने आनेवाले कुछ दिनों ने अपने 1100 कर्मचारियों का छटनी करने का मन बना लिया है। इसके पहले स्विगी के कॉम्पिटिटर कंपनी जोमोटो ने अपने 13 फीसदी कर्मचारियों को छटनी करने ऐलान कर चुकी है। इसके अलावा बाकी बचे कर्मचारयों के सैलरी में भी छटनी कर चुकी है।

स्विगी के को-फाउंडर श्री हर्ष मजेती ने कहा है की फ़ूड डिलीवरी बिज़नेस पर गहरा असर पड़ा है और इससे सँभालने में काफी समय लगेगा। हाला की आने वाले समय में इसे पटरी पर आने की पूरी उम्मीद है हमें अपने कंपनी में कर्मचारियों की संख्या कम करने और आने वाले समय में किसी भी अनिश्चिता को निपटने के लिए लगत काम करने की जरुरत है।

लॉकडाउन के वजह से होटल के कारोबार में जबर्दस्त झटका लगा है जिसे उभरने में कई साल लग जायेंगे। जिसका सीधा असर ऑनलाइन फ़ूड डिलीवरी कंपनियों पर देखा जायेगा। रिपोर्ट के मुताबिक स्विगी के डिमांड में 60 प्रतिसत की कमी आई है जिसके चलते कंपनी ये फैसला लेने को मजबूर है। माजेन्ति ने कहा है की इसका सबसे जयादा असर कंपनी के क्लाउड किचेन पर पड़ेगा उन्होंने कहा हम उन बिज़नेस को बंद करने जा रहे है जो या तो पूरी अस्थिर होने जा रहा है या फिर अगले 18 महीनो तक उनकी कोई जरुरत नहीं रहेगी।

फाउंडर ने कहा की जिन कर्मचारियों की छटनी की जाएगी उन्हें कम से काम 3 महीने की सैलरी एक्सीलेरेटेड वेस्टिंग, दिसंबर तक हेल्थ इन्शुरन्स और कोम्पनी में उन्होंने जितने समय बिताये उसमे हर साल के लिए अतिरिक्त बेतन दिया जायेगा।

NRAI के मुताबिक जोमाटो स्विगी जैसी कम्पनयों का कारोबार घटकर 10 फीसदी पर आगया है। अनुमान है कोरोना के चलते उसके 5 लाख सदस्यों को साल 2020 में 80 हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है लॉकडाउन 4.0 से पहले सरकार के तरफ से आये 20 लाख करोड़ के भरी भरकम आर्थिक पैकैज में भी रेस्टोरेंट और फ़ूड डिलीवरी जैसे कंपनियों के लिए कोई राहत नहीं दी गई है जिससे इस तरह के कम्पनयों को पटरी पर आने में सालों का समय लग सकता है।

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