भारत की तैयारियों को देख कर चीन के बदले शुर

चीन के खिलाफ अमेरिका भी घेरा बंदी करने में जूटा हुआ है। चालक चीन को तिब्बत, ताइवान,और हॉंकॉंग में ट्रिपल टेंसन मिल गई है। जिसके बाद चीन जो बॉर्डर पर तेबर दिखा रहा था अब उसने अपने सुर बदल लिए है।

चीन पहले ही हॉंकॉंग के बिद्रोह से हिला हुआ है और ताइवान की बढ़ती ताकत से वो परेशान है तिब्बत पर अमेरिका के रुख से चीन टेंसन में है। यानि की चीन जिन तीन देशो पर अपना अधिकार बताता था आज की तारीख में वही चीन के खिलाफ ताकतवर देशो के ट्रिगर पॉइंट बने हुए है जिसके बाद चीन को बैकफुट पर आना पड़ा है।

हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागु करने से नाराजगी तो है वही ताइवान को दुनिया में मान्यता मिलने से चीन परेशान होता जा रहा है। इस बीच लद्दाख में चीनी और भारतीय फ़ौज के बीच तना तानी भी जारी है चीन को मालूम है की लद्दाख में उसकी सेना से कोई चूक हुई तो मामला सर्फ भारत और चीन तक सिमित नहीं रह पायेगा। लिहाज़ा चीन के विदेश मंत्री ने सफाई दी है और कहा है की भारत के साथ सिमा पर स्थिति में नियंत्रण में है। और जो भी अड़चन है उसे बात चित के जरिये भी सुलझाया जायेगा।

चीन जनता है की प्रधान मंत्री मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार चुप बैठने वालो में से नहीं है समय के साथ अगर जरुरत पड़ी तो अपने निति में बदलाव भी कर सकते है। कुल मिला कहे तो दुनिया को कोरोना के चक्रव्यू में फ़साने वाला चीन खुद चक्रव्यू में फस गया है। तिब्बत की राजधानी लहासा को चीन ने कब्ज़ा कर रखा है तिब्बत बौद्ध आवादी वाला इलाका है। और भारत का पडोसी भी लेकिन पचास के दसक में चीन के कब्जे के बाद यहाँ के लोग भारत में शरण ले चुके है। इस तिब्बत देश को अलग देश का दर्जा देने की तैयारी अमेरिका ने की है। जिस दिन अमेरिका से खबर आई उसी दिन चीन से भी युध की तयारी वाली खबर भी आई। ये महज़ संयोग भी हो सकता है लेकिन इस संयोग का समीकरण ये है की तिब्बत हांगकांग और ताइवान से जयादा चीन की दुखती रग है। दुनिया में जहा भी तिब्बत के लोग शरण लिए हुए है वहा वह तिब्बत की आज़ादी की मांग बुलंद करते रहते है। चीन की चालबाजियों को काटने के लिए अमेरिका ने ताइवान, तिब्बत और हांगकांग को लेकर दखल शुरू कर दिया है।

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