सरदार पटेल की मूर्ति मेड इन चीन तो नहीं ? बिवाद खड़ा हो गया है पटेल की मूर्ति पर

मोदीजी ने एक बादा किया था साल २०१० में, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे और वो बादा था स्टैचू ऑफ यूनिटी का बादा लेकिन उस बक्त इसका ये नाम नहीं था तब बस सरदार पटेल की मूर्ति की बात हुई थी ८ साल बाद मोदी बतौर प्रधानमंत्री ने इस स्टैचू ऑफ़ यूनिटी का उद्धघाटन किया,
आज हम आपको इस मूर्ति के बारे में बताएंगें।

1 क्यों है इस मूर्ति का ऐसा नाम।   

इस मूर्ति का नाम है स्टैचू ऑफ़ यूनिटी इससिए क्युकी सरदार पटेल ने आजादी के बाद ५६० से भी जयादा देशी रियासतों का भारत में एकीकार किया और भारत की एकता को बचा कर रखा साल २०११ में मोड़ जी ने सरदार बलभ भाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट का गठन किया था इस ट्रस्ट ने एक काम किया इस ट्रस्ट ने देश भर के किशानो से लोहा और मिटटी मंगवाया जिसका वजन था १२९ टन इस लोहे और मिटटी से सरदार पटेल की मूर्ति बनाया गया और इस मूर्ति का नाम रखा गया स्टैचू ऑफ़ यूनिटी और इस मूर्ति को देश की एकता का पार्य बन गया।

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2. क्या है इस मूर्ति की खासियत ?

ये मूर्ति दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है इस मूर्ति की उचाई है 182 मीटर। ये अमरीका के स्टैच्चू ऑफ़ लिबर्टी से दुगनी उचाई की मूर्ति है। इस प्रोजेक्ट में कुल 2900 करोड़ रूपया खर्च हुई है और समय की बात करे तो इसमें कुल 42 महीने का समय लगा है और इस मूर्ति को डिज़ाइन किया है रामबीर सुताल ने, आपको बता दे की सुल्तान एक मूर्ति कार है और इन्हें पद्मभूषण सम्मान भी मिला है।

3 ये मूर्त बानी कहा पर है ?

ये मूर्ती गुजरात के सरदार सरोबार बांध के पास बनाया गया है

4 कैसे बानी इतनी बड़ी मूर्ति ?

तो आपको बता दे की इस मूर्ति का बेस 25 मीटर उचा है और मूर्ति 3 लेयर से बानी है पहली लेयर आरसीसी से बनी है आरसीसी जिससे हमारी और आपकी गलियों की सड़कें बनती है। और इसके ऊपर की लेयर स्टील की है और उसके ऊपर चढ़ी है एक परत जो की काँसा है और हमें भी नज़र आएगा और काँसा 2 मम मोटा है। इस्सके दोनों टाबर में एक-एक लिफ्ट लगी है जो की 4 मीटर प्रति सेकंड से एक साथ २६ लोगो को ऊपर ले जायेगी।
अब बात आती है सरदार पटेल का चेहरा कौन पहचानता था और इसे बांया कैसे जाए तो इसके लिए एक 18 फ़ीट की मूर्ति बनाई गई और उनके गांव वालों को दिखाया गया। ये मूर्त उन दो लोगो को भी दिखाया गया जिन्होने सरदारपटेल को देखा था और तब उनके आधार पर मूर्त तैयार की गई।

5 चीन की मदद क्यों लेनी पड़ी ?

जबाब है पर उसके पहले आप इन चीजों पर भी ध्यान दें आप जानते है इस मूर्ति में 70 हज़ार मिट्रक टन सिमेंट लगा है आप जानती है इतनी सीमेंट में
3500 टू bhk घर बन सकते है, दो लाख बारह हज़ार मीटर कांक्रीट लगा है और इन सब का बजन सरदार पटेल के पैरो पर आ रहा था और देश के हर बड़े ढलाई घर ने हाथ खड़े कर दिए और तब जा के चीन की मदद लेनी पड़ी चीन के एक कंपनी JTQ को ये काम सौपा गया और तब काम सुरु हुआ और एक एक कर चीन से काँसे की प्लेट आने लगी ऐसे ही 7 हज़ार प्लेटो से सरदार पटेल की मूर्ति बनाई

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