Reality Of The Statue ! दुनिया के सबसे टॉलेस्ट स्टेचू की सच्चाई क्या है कही ये आपको बेवकूफ तो नहीं बनाया जा रहा है जरूर पढ़ें !!!

दुनिया का टॉलेस्ट स्टैच्चू अब हमारे देश में है, कितने गर्व की बात है न. अब पूरी दुनिया हमें रेस्पेक्ट की नजरो से देखेगी लाखों, करोडो टूरिस्ट आएंगे दुनिया भर से इस मूर्ति को देखने क लिए और टूरिस्म इंडस्ट्रीज को कितना फ़ायदा पहुंचेगा ! कितने सारे नए रोजगार पैदा होगा लोगो को नौकरिया मिलिगे, ऐसा हम नहीं कह रहे है ऐसी चीजे सुनने को मिल रही है इस मूर्ति के बारे में,

तो आज हम आपको इस मूर्ति से रिलेटेड साड़ी आस्पेक्ट के बारे समझने वाले है जैसे कल्चरल, सोशल, इकोनोमिकल और प्राइड रिलेटेड आस्पेक्ट के बारे में बताएँगे,

Economical इस पुरे प्रोजेक्ट की कुल लागत है 3000 करोड़ रुपये, और सिर्फ मूर्ति बनाने में टोटल खर्च आई है 1350 करोड़ रुपये,जो की आज के कन्वर्शन रेट 180 मिलियन डॉलर होता है, कंप्रिजन के लिए बताऊ तो अभी तक जो दुनिया का सबसे टॉलेस्ट स्टेचू था वो था Spring Buddha जो की चीन में है हालाँकि अब ये सेकंड टॉलेस्ट हो गया है, लेकिन इस स्टेचू की पूरी लगत थी 55 मिलिया डॉलर,और सिर्फ स्टेचू की बात करे तो 18 मिलियन डालर लगे है,
तो अब आप ही कम्पेयर करो की वोर्क्ड का सेकंड लेटेस्ट स्टेचू सिर्फ 55 मिलियन में बन गया और वर्ल्ड का टॉलेस्ट स्टेचू बनने में 180 मिलियन डालर की लगत आयी है पुरे 10 गुना का फर्क है यहाँ पर, और अगर आप हाइट को कम्पेयर करें तो सेकंड टॉलेस्ट स्टेचू 128 मीटर की है तो टॉलेस्ट स्टेचू 182 मीटर की यहाँ पर तो 10 गुना का फर्क नहीं दीखता,
तो यहाँ पर एक सबाल उठता है की क्या खास बात है इस मूर्ति में की इस मूर्ति की कॉस्ट 10 गुना जयादा प्राइस है, अब अगर इन्फ्लेसन की बात करें तो स्प्रिंग बुद्धा 15 साल पहले बना था, लेकिन 10 गुना तो इन्फ्लेसन भी नहीं हुआ है यहाँ पर, और बहार से स्टेचू को देखने पर कोई जयादा फर्क भी नहीं दीखता है ऐसा तो नहीं है की सरदार पटेल की मूर्ति सोने की बानी है तो ये एक इकोनोमिकल लोचा है,

Return Of Investment-  अब कुछ लोगो का कहना है की स्टेचू में लगा पैसा बापस आजायेगा जब टूरिस्ट घूमने आएंगे यहाँ पर तो आपको बता दे की भारत की मोस्ट फेवरेट और विजिटेड प्लेस में ताज महल आता है, जिसे देखने 8 मिलियन लोग साल भर में आते है और साल भर में मात्रा 25 करोड़ का ही रेवेन्यू जेनरेट कर पाती है ताजमहल,

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अब अगर ये मान भी ले की कुछ समय बाद स्टेचू ऑफ़ यूनिटी ताजमहल जुटना जितना पॉपुलर हो भी जाता है तो ये पुरे साल में 25 करोड़ करोड़ का ही रेवेन्यू जेनरेट कर पायेगा और इसमें लगा 3000 करोड़ को रिकवर करने में 120 साल का समय लग जायेगा तो ये तो रिटर्न ऑफ़ इन्वेस्टमेंट के हिसाब से भी ठीक है है नहीं है।

अब कुछ लोग कहेंगे की ये तो सिर्फ एंट्रेंस टिकट के ही कीमत है ये क्यों नहीं देखा जाता है की वहां पर लोकल कितने नए बिज़नेस खुलेंगे, कितने लोगो को रोजगार मिलेगा, लेकिन अगर हमें लोगो को नए रोजगार ही देना था तो 3000 करोड़ खर्च कर के मूर्ति बनाने की जरुरत नहीं थी हम उसी पैसे से नए कॉलेजेस, स्किल डेवलपमेंट सेण्टर खुलवा सकते थे जिससे लोग खुद रोजगार पैदा कर सकते थे।

 

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