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इन आधा दर्जन गांवों के लोग नहीं मानते हैं दिवाली, जानिए क्या है वजह

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आधा दर्जन से ज्यादा गांवों के लोग दिवाली पर पटाखे नहीं चलाते हैं। यह पिछले कई सालों से हो रहा है। यहां के लोग पटाखों की जगह पौधा रोपण कर दिवाली का त्यौहार मनाते हैं। यह गांव पंजाब के बठिंडा जिले में पड़ते हैं। दरअसल, तेल डिपो व रिफाइनरी होने के कारण सुरक्षा के लिहाज से आधा दर्जन के करीब गांवों के निवासी इस बार भी पटाखों के साथ दीपावली नहीं मना पाएंगे।

ग्रामीण पटाखे चलाने के बजाए पौधे लगाकर दीपावली मनाएंगे। जिला प्रशासन ने तेल डिपो के साथ लगते गांव फूस मंडी, भागू और रिफाइनरी के साथ लगते गांव कणकवाल, फुल्लोमिटठी, पकका कलां, बाघा के लोगों को दीपावली पर सुरक्षा के लिहाज से पटाखे चलाने के लिए रोका गया है।

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इसके अलावा इलाके में दीपावली के दिन कोई भी ज्वलनशील पदार्थ नहीं जाने दिया जाता, जिससे रिफाइनरी व तेल डिपो की सुरक्षा को खतरा हो। फूस मंडी निवासी राजविंदर कौर ने बताया कि गांव के पिछले पांच वर्षों से लगातार दीपावली का त्यौहार नहीं मना रहे है। उनके गांव के बिलकुल साथ तेल के तीन डिपो और आर्मी का आयुध डिपो होने के कारण दीपावली के दिन कभी भी उनके गांव के लोगों ने पटाखे नहीं चलाए।

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गांव में पौधे लगाकर प्रदूषण रहित दीपावली मनाई जाती है। उन्होंने बताया कि गांव के लोग अपने घरों की सजावट तक नहीं करते। गुरू गोबिंद सिंह तेल शोधक कारखाना रिफाइनरी के समीप गांव फुल्लोमिटठी निवासी सुखजिंदर सिंह ने बताया कि जब से उनके गांव के पास रिफाइनरी लगी है तब से अन्य नजदीकी गांव के लोगों ने दीपावली का त्यौहार नहीं मनाया है। गांव के लोग प्रदूषण रहित दीपावली मनाकर अपने अपने गांव व खेतों में ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाते है, जिससे पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सकें।

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